Sunday, September 15, 2013

‘जनजाति क्षेत्रों में सूचना माध्यमों की पहुंच व प्रभाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन’

‘जनजाति क्षेत्रों में सूचना माध्यमों की पहुंच व प्रभाव का विश्लेषणात्मक अध्ययन’
(सर्व शिक्षा अभियान के विशेष संदर्भ में)



प्रस्तावना
संचार का सामान्य अभिप्राय लोगों का आपस में विचार, आचार, ज्ञान तथा भावनाओं का कुछ संकेतों द्वारा आदान-प्रदान करना है। संचार की मुख्य क्रिया है मानव व्यवहार पर असर डालना। इसलिए व्यक्तिगत स्तर पर हमें मालूम होना चाहिए कि लोग सूचना व जानकारी एवं संदेश की अनुभूति कैसे प्राप्त करते हैं तथा उसे ग्रहण करने के लिए किस प्रकार राजी होते हैं। जनसंचार एक विशेष प्रकार का संचार है। यह कैसे होता है और इसकी आधुनिक समाज में क्या उपयोगिता है, इसकी जानकारी जरूरी है। जनसंचार माध्यम हमें सूचना व शिक्षा देते हैं तथा हमारा मनोरंजन भी करते हैं।
जनंसचार का प्रारंभ अख़बारों के उदय के साथ माना जाता है। लेकिन प्रिंट मीडिया के विकास से पहले परंपरागत रूपों में जनसंचार मौजूद था। व्यापक लोगों तक किसी सूचना को पहुंचाने के लिए ढोल-नगाड़े, डुगडुगी, भोंपू, तोप, चर्च की घंटियां, धुआं, आग तथा अन्य संकेतों का उपयोग होता था। इन रूपों में होने वाले जनसंचार में संकेतों की ऐसी व्यवस्था समाहित होती है, जिनकी व्यापक लोगों द्वारा एक समान रूप में व्याख्या संभव हो। संचार की आवश्यकताओं के विकास के साथ ही संचार के रूपों एवं उपकरणों का भी विकास होता गया।
हालांकि आज के परिप्रेक्ष्य में जनसंचार के सभी माध्यमों को मीडिया कहते हैं। मीडिया के लिए विकास एवं लोक सेवा की अवधारणा नई नहीं है। मीडिया के चरित्र में ही विकास एवं लोक सेवा की भावना निहित है। वर्तमान समय में सर्व शिक्षा अभियान को जनजाति क्षेत्रों में सफल बनाने के लिए सरकार ने मीडिया को काफी महत्त्व देते हुए मीडिया के विभिन्न माध्यमों के द्वारा सर्व शिक्षा अभियान की सूचना जनजातियों तक पहुंचाने का प्रावधान किया है। लोकतंत्र में सर्व शिक्षा अभियान संबंधी नीतियों को बनाना सरकार का दायित्व है, लेकिन इन नीतियों की जानकरी संबंधित जनता तक पहुंचाने का नैतिक दायित्व मीडिया पर होता है। अपने इस दायित्व का निर्वहन करते हुए मीडिया, केवल योजनाओं की जानकारी ही जनता तक पहुंचाने तक अपने आप को सीमित नहीं रखता है, अपितु मीडिया योजना के सफल या असफल बनाने की कार्यप्रणाली से भी जनता व सरकार को समय-समय पर अवगत करता रहता है, साथ ही साथ उक्त संबंध में सुझावों को भी प्रस्तुत करता है ।
वैसे सरकारी रिपोर्ट के अनुसार पूरे भारत वर्ष में 6654 प्रखंड हैं। जिसमें से 3451 प्रखंड भारत सरकार के अनुसार शैक्षिणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। गैर-आदिवासी व आदिवासी राज्यों की तुलना करे तो हरियाणा जहां आदिवासियों की शून्य जनसंख्या है। वहां पर कुछ प्रखंड 191 हैं जिनमें से मात्र 36 प्रखंड शैक्षिणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। वहीं मध्य प्रदेश जहां जनसंख्या के स्तर पर सर्वाधिक आदिवासी निवास करते हैं। कुल 313 प्रखंडों में से 201 प्रखंड शैक्षिणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। अनुपपुर जिले के सभी चार प्रखंड/तालुका शैक्षिणिक रूप से पिछड़े हुए हैं। प्राथमिक शिक्षा व साक्षारता विभाव के मीडिया कमेटी की 16 जुलाई, 2010 को हुई बैठक में सर्व शिक्षा अभियान के प्रचार हेतु 100 दिनों का प्रचार अभियान दूरदर्शन, ऑल इंडिया रेडियो द्वारा चलाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा अभियान के प्रचार-प्रसार हेतु लोक सभा चैनल के साथ-साथ 32 निजी चैनलों के लिए डीएवीपी विज्ञापनों का प्रावधान किया गया। प्रिंट माध्यम की महत्ता को स्वीकार करते हुए सरकार ने प्रिंट माध्यमों से भी अभियान का प्रचार करवाया। शिक्षक दिवस, बाल दिवस व कॉमन वेल्थ खेलों के दौरान अभियान के प्रचार व प्रसार हेतु विशेष अभियान चलाए गए।
वैसे किसी भी समाज के विकास के लिए शिक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण कारक होती है। किसी भी देश का भविष्य उस देश के बच्चों में निहित होता है जैसा कि शिक्षा के विकास में समाज की सर्वांगीण विकास की संभावनाएं परिलक्षित होती हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 । में 6-14 वर्ष तक के बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा की व्यवस्था की गई है। भारत सरकार तथा राज्य शासन द्वारा शैक्षणिक विकास हेतु अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। शिक्षा के विकास के लिए योजनाओं के निर्माण के क्रम में सरकार ने प्राथमिक शिक्षा की महत्ता को समझा तथा प्राथमिक शिक्षा के विकास के लिए विभिन्न कालखंड में योजनाओं का निर्माण किया। वर्तमान में सर्व शिक्षा अभियान प्राथमिक शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने की दिशा में प्रयासरत है।
इस संदर्भ में बात करें तो सरकार की भेदभावपूर्ण नीति का ही परिणाम है कि देश की कुल साक्षरता दर की तुलना में जनजातीय समाज की साक्षरता दर वर्तमान में भी कम है। ‘‘प्रो. रामशरण जोशी ने 1976 -1977 में बस्तर के आदिवासियों में आधुनिक शिक्षा के अध्यन के दौरान पाया कि “प्रशासन से लेकर सवर्ण अध्यापक तक प्रायः इस विश्वास के थे कि यह जाहिल, काहिल, जंगली जाति (आदिवासी ) कभी सभ्य नहीं बन सकते।’’ 
            जनजातीय शिक्षा के विकास में भाषा भी एक बड़ी बाधा है। अधिकतर जनजातीय भाषाएं मौखिक हैं जिनकी कोई लिपि नहीं है। अधिकतर राज्यों में जनजातीय तथा अन्य जनसंख्या को एक ही भाषा में शिक्षित किया जा रहा है जिसके कारण अधिकतर जनजतियों में रुचि की कमी हो जाती है।
             प्राथमिक शिक्षा के क्षेत्र में सर्व शिक्षा अभियान एक राष्ट्रीय योजना के रूप में देश के सभी जिलों में लागू की जा रही है। सर्वशिक्षा अभियान का उद्देश्य 6-14 वर्ष के आयु वर्ग वाले सभी बच्चों को उपयोगी और प्रासंगिक प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। सर्व शिक्षा अभियान में बालिकाओं, अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों तथा कठिन परिस्थितियों में रह रहे छात्रों की शैक्षिक आवश्यकताओं पर विशेष ध्यान देने का प्रावधान किया गया है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत जिन आबादी क्षेत्रों में अभी तक स्कूल नहीं हैं, वहां नए स्कूल खोलना तथा अतिरिक्त कक्षाओं हेतु नए कमरे, शौचालय, पेयजल, रख-रखाव एवं स्कूल सुधार अनुदान के माध्यम से नए स्कूल खोलना और उनमें सुधार लाना शामिल है। शिक्षा के अंतर को समाप्त करने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों तक में कंप्यूटर शिक्षा दिलाने का भी प्रावधान है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सर्व शिक्षा अभियान के तहत स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी कमी लाने में सफलता प्राप्त हुई है।
            सर्व शिक्षा अभियान प्रारंभिक शिक्षा के सार्वजनिकरण का एक प्रयास है। इस अभियान के अंतर्गत प्राथमिक शिक्षा द्वारा सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने तथा पूरे देश में गुणवत्ता युक्त प्राथमिक शिक्षा देने पर जोर दिया गया। यह योजना केंद्र सरकार, राज्य सरकार और स्थानीय संस्थाओं के मध्य सहयोग पर आधारित है। जिसके अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं, शाला प्रबंधन समितियों, ग्राम शिक्षा समितियों, शहरी कच्ची बस्तियों की शिक्षा समितियों, जनजातीय स्वायत परिषद तथा अन्य संस्थानों का विद्यालय प्रबंधन के कार्य को भी सम्मलित किया गया। सर्व शिक्षा अभियान (2000-01) भारत सरकार का एक प्रमुख कार्यक्रम है, जिसकी शुरूआत अटल बिहारी बाजपेयी द्वारा एक निश्चित समयावधि के तरीके से प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण को प्राप्त करने के लिए किया गया। इस संदर्भ में गांधी जी का यह कथन आज भी प्रासंगिक है कि ‘‘शिक्षा को इस प्रकार से क्रांतिकारी बनाया जाए जिससे कि वह निर्धनतम ग्रामीण की जरुरतों का जवाब बन सके, बजाए इसके कि वह केवल साम्राज्यवादी शोषकों की ही जरूरतों की पूर्ति करे।’’
शोध का उद्देश्य
·        सर्व शिक्षा अभियान के संदर्भ में संचार माध्यमों के पहुंच व प्रभाव का अध्ययन करना।
शोध की उपकल्पना
·        जनजातीय क्षेत्रों में मीडिया के आधुनिक माध्यमों की पहुंच नहीं है।
·        जनजातीय समाज शिक्षा के प्रति जागरूक नहीं है।
साहित्य का पुनरावलोकन
·        रामशरण जोशी, आदिवासी समाज और शिक्षा (1999):- राष्ट्रीय मुख्य धारा में विलय के नाम पर छात्रावासों में रामायण और हनुमान चालीसा का पाठ अबोध आदिवासी छात्रों पर लाद दिया गया था, जो की उनके लिए सर्वथा अप्रासंगिक था और उनकी परिस्थितिजन्य वास्तविकताओं से कतई मेंल नहीं खाता था ।
·        नदीम हसनैन, जनजातीय भारत (2007):- वर्तमान शिक्षा प्रणाली के अंतर्गत कोई भी बच्चा कम से कम 10 साल बाद ही परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में सहायक हो सकता है।  आदिवासी परिवार की विवशता है कि ये लोग इतने धैर्य का परिचय नहीं दे सकते। ऐसी शिक्षा प्रणाली इन्हें संतुष्ट कर सकती है जिससे इन्हें  तत्काल लाभ होना प्रारम्भ हो जाए।
शोध का महत्त्व
हेराल्ड लॉसवेल के मॉडल के अनुसार क्या, कौन, किस माध्यम से, किससे और कैसे सूचनाओं का संप्रेषण किया जाता है। यह तय करता है कि सूचना लक्षित समुदाय को कितना और कैसे प्रभावित करती है? सरकार द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अनेक योजनाएं बनाई जाती हैं लेकिन समस्या आजादी के 67 वर्षों बाद भी जस-के-तस बनी हुई है। सरकार द्वारा संचार के विभिन्न माध्यमों से निरंतर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है फिर भी जनजातीय शिक्षा की हालत आज भी बद-से-बदतर बनी हुई है। प्रस्तुत शोध पत्र के माध्यम से प्राप्त तथ्यांे के अनुसार अगर सरकार योजनाओं के प्रचार-प्रसार हेतु मीडिया का उपयोग पूर्णतः कर, जनजातीय समुदाय को इसका लाभ पहुंचाना चाहती है तो यह शोध पत्र सरकार के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगी। शोध पत्र में संचार की असफलता के कारणों पर भी प्रकाश डाला गया है। सरकार चाहे तो इन कारणों का निराकरण कर जनजातीय क्षेत्रों में योजनाओं का सफल क्रियान्वयन कर सकती है।
शोध की सीमाएं
·        प्रस्तुत शोध पत्र में अध्ययन के अंतर्गत दो जनजातिय गांवों को शामिल किया गया है।
·        शोध पत्र का केंद्र सर्व शिक्षा अभियान और मीडिया पर केंद्रित है।
शोध प्रविधि
अनुसंधान व शोध कार्य के निमित्त तथ्यों के संकलन स्रोतों हेतु दो भागों में विभाजित किया गया- प्राथमिक स्रोत तथा द्वितीयक स्रोत। प्रस्तुत शोध पत्र लेखन में तथ्यों का संकलन व विश्लेषण इन दोनों स्रोतों के आधार पर किया गया।; यथा-
·        आंकड़ों का संकलन
o   प्रथमिक आंकडे़ः- अनुसूची
प्राथमिक आंकड़ों के रूप में अनुसूची की सहायता से आंकड़ों को एकत्रित करने का प्रयास किया गया है।
·        द्वितीयक आंकड़े:- पुस्तकालय अध्ययन
द्वितीयक स्रोतों के रूप मीडिया व सर्व शिक्षा अभियान से संबंधी विभिन्न पुस्तकें, पेपर्स, जर्नल, रिब्यूज, बुलेटिन एवं इंटनेट आदि द्वारा तथ्यों को संकलित किया गया।
·        आंकड़ा विश्लेषण
·        विश्लेषणात्मक शोध प्रविधि
प्रस्तुत शोध पत्र लेखन में कुल 30 उत्तरदाताओं के माध्यम से अनुसूची को भरवाया गया। अनुसूची को भरवाने के लिए स्त्री-पुरुषों दोनों का चयन निदर्शन विधि से किया गया है। अनुसूची के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों को एकत्रित करके तथ्यों का विश्लेषण किया गया।
शोध क्षेत्र का परिचय
जनजाति क्षेत्र अधिकांशः पहाड़ी इलाके में स्थित है। शोधार्थी के शोध अध्ययन का क्षेत्र मैकाल पहाड़ी श्रृंखला पर स्थित मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित बंजारी व धनौली पंचायत के बेदखोदरा और सहाकौना गांव है। शोधार्थी द्वारा यहां आदिवासी समुदाय के 30 सदस्यों द्वारा शोध विषय से संबंधित अनुसूची भरवाई गई। शोध क्षेत्र के गांव में बैगा आदिवासी का निवास है। यहां आबादी काफी विरल है। शोध क्षेत्र के आदिवासी समुदाय का जीवन यापन मुख्य रूप से कृषि व मजदूरी पर आधारित है। बाल-विवाह आम है। शोध क्षेत्र आधुनिक विकास के मापदंड से काफी दूर है।
आंकड़ों का विश्लेषण
·        बेदखोदरा और सहाकोना गांव में संचार के माध्यमों की उपलब्धि, संचार की उपयोगिता और सर्व शिक्षा अभियान की जानकारी का माध्यम।
  

·        आदिवासियों में सर्व शिक्षा अभियान की जानकारी, घर में 14 साल से कम आयु के बच्चे और बच्चों का स्कूल जाना

आदिवासियों के नजर में सर्व शिक्षा अभियान किसने शुरू किया


 बच्चों को स्कूल भेजने के किसने प्रेरित किया? 
 ·        सर्व शिक्षा अभियान की जानकारी लेने कौन-कौन आए?
सर्व शिक्षा अभियान और स्कूल में प्रदान की जाने वाली वर्तमान शिक्षा से संतुष्टि 
सर्व शिक्षा अभियान की अनियमित्ता 
सर्व शिक्षा अभियान के संदर्भ में शिकायत
 सर्व शिक्षा अभियान की समस्या पहुंचाने का माध्यम
 सर्व शिक्षा अभियान से परिवार की शैक्षिणिक को बेहतर बनने की स्थिति
  सर्व शिक्षा अभियान की सफलता
प्रश्न संख्या 17 का विश्लेषण-
सर्व शिक्षा अभियान की सफलता के लिए बच्चों का स्कूल जाना अनिवार्य शर्त है। पुनः संबंधित लक्षित सूमह तक कार्यक्रम की सूचना लोकतांत्रिक मीडिया माध्यम से जनतांत्रिक तरीकों से पहुंचाना उतनी ही जरूरी है। सरकार ने मीडिया के विभिन्न माध्यमों को सर्व शिक्षा अभियान के प्रचार-प्रसार हेतु बजट प्रदान किया है लेकिन शोधार्थी को प्राप्त उत्तरों के अनुसार शोध क्षेत्र में मीडिया के माध्यम सर्व शिक्षा अभियान की जानकारी पहुंचाने में असक्षम है। मीडिया माध्यमों की असफलता का मुख्य कारण संबंधित क्षेत्र में मीडिया माध्यमों का उपयोग करने हेतु अनिवार्य संसाधनों की अनुपलब्धता है। किसी भी योजना की सफलता में कई सारे कारकों का योगदान होता है। आम तौर पर मानव समाज रोटी, कपड़ा और मकान के बाद शिक्षा की अनिवार्यता पर ध्यान देता है। शोध क्षेत्र में रोजगार, सड़क, पानी की उचित सुविधा न हो पाने के कारण शोध क्षेत्र के जनजाति शिक्षा की महत्ता को स्वीकार करने के बावजूद भी अपने बच्चों को निरंतर स्कूल नहीं भेज पाते हैं। योजना से संबंधित वर्ग द्वारा प्रतिपुष्टि व सुझाव योजना के लिए संजीवनी का काम करते हैं। आम तौर पर यह कहा जाता है कि जनजति समाज अन्य समाज से संपर्क स्थापित करने में कतराता है। इसके कारण विभिन्न हो सकते हैं। चुप रहने के कारण गैर आदिवासी समाज के कुछ सदस्य आदिवासी समाज को मौनी बाबा की संज्ञा देते हैं। उनकी इस धारणा को तोड़ते हुए शोध क्षेत्र के संबंधित आदिवासी समुदाय ने ग्राम विकास हेतु स्कूल, सड़क आदि की उपलब्धता को अनिवार्य बताया। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान से संतुष्ट होने तथा इसे प्रभावित बनाने हेतु स्कूल को निवास स्थान के निकट बनाने का सुझाव दिया।
आधुनिक विकास की धारा से दूर आधुनिक सुविधाओं से वंचित गांव के सदस्य के लिए शोध के दौरान शिक्षा के अलावा अन्य अनुपलब्ध सुविधा के बारे में अपने राय देना स्वाभिक था। अतः शोध क्षेत्र के सदस्यों द्वारा पानी, बिजली, सड़क योजनाओं के क्रियान्यवन पर अपना मत देते हुए कहा कि यह सुविधाएं वर्तमान में शोध क्षेत्र में उपलब्ध नहीं हैं। आदिवासी समुदाय द्वारा अपनी राय को व्यक्त करना यह दर्शाता है कि समाज में विकास की राह से जुड़ना चाहता है और इस राह में अगर संचार माध्यमों का साथ उन्हें मिले तो शिक्षा के साथ-साथ अन्य पहलू जो विकास के लिए मापदंड का कार्य करती है का विकास शोध क्षेत्र में प्रारंभ हो जाएगा।
निष्कर्ष
संचार का काम सूचना देना, शिक्षित करना एवं मनोरंजन करना है। संचार माध्यम योजनाओं तथा विकास के कार्यों को संप्रेषित करते हैं। लेकिन संचार माध्यम तभी अपने काम को सुचारु रुप से संचालित कर सकते हैं जब उनके लिए आधारभूत संसाधनों की पूर्णतः उपलब्धता हो। वहीं संबंधित शोध क्षेत्र में अध्ययन करने के उपरांत ज्ञात हुए कि बिजली और सड़क की अनुपलब्धता के कारण वहां पर कोई भी संचार माध्यम अपनी पहुंच से परे है। सरकार द्वारा संचालित हर बच्चे को शिक्षा का अधिकार यानि सर्व शिक्षा अभियान का कार्यक्रम चला रही है। लेकिन संचार माध्यमों की अनुपलब्धता के कारण 53.33 प्रतिशत लोगों को इस योजना के बारे में जानकारी नहीं है। विवेकानंद ने कहा है ‘‘ज्ञान से ज्ञान का विकास होता है।’’ आज के जनजाति समुदाय को योजनाओं की उचित जानकारी नहीं मिल पाती है जिससे योजनाएं तो असफल होती ही है साथ ही साथ देश का विकास भी प्रभावित होता है। संचार के नए माध्यमों में केवल मोबाइल का उपयोग सबसे ज्यादा किया जाता है इसका कारण यह है कि लोग उसे कहीं भी लेकर जा सकते हैं तथा बिजली की कमी के बावजूद भी उसे गांव से बाहर जाकर चार्ज किया जा सकता है।
सर्व ष्शिक्षा अभियान 6 से 14 साल तक के बच्चों को शिक्षित करने का एक कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य सभी बच्चों को शिक्षित करना है लेकिन आज भी सभी बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के कारण बच्चे अपने मां-पिता के साथ काम पर चले जाते हैं जिस कारण से उनकी शिक्षा प्रभावित होती है। माता-पिता अशिक्षित होने के बावजूद भी वह अपने बच्चों को शिक्षित तो करना चाहते हैं। परंतु उन्हें सही समय पर योजनाओं की सही जानकारी नहीं मिल पाने के कारण के साथ-साथ आर्थिक मजबूरी के कारण अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेज पाते हैं। फिर भी 27.67 प्रतिशत जनजाति के लोग स्वयं की समझ व अपने व परिवार के विकास हेतु बच्चों को पढ़ने के लिए स्कूल भेजते हैं तथा उनकी नियमितता को बनाए रखते हैं। जानकारी के बिना विरोध का सवाल ही नहीं उठाया जा सकता है। लोगों को सर्व शिक्षा अभियान योजना की पूर्ण जानकारी न होने के कारण माध्यान भोजन, स्कूल वेशभूषा, बच्चों के लिए किताबें तथा छात्रवृत्ति से संबंधित कोई भी शिकायत नहीं है।
उपरोक्त आंकड़ों के विश्लेषण से यह निष्कर्ष ज्ञात हुआ कि जनजातीय क्षेत्रों में मीडिया के आधुनिक माध्यमों की पहुंच नहीं है। जबकि जनजातीय समाज शिक्षा के प्रति जागरूक तो है लेकिन आवश्यक संरचनाओं के अभाव में जनजाति समाज शिक्षा प्राप्त करने में असमर्थ है। क्योंकि सरकार केवल योजनओं को बनाने का ही काम करती है उन्हें सही तरीके से क्रियान्वित नहीं कर पाती है। सरकार योजनओं को लागू करने के बाद उसके बारे में लोगांे की राय तथा जानकारी संबंधित कोई सार्थक प्रयास नहीं करती है। सरकार द्वारा मीडिया के विभिन्न माध्यमों को लक्षित तो करती है लेकिन सरकार के यह लक्षित माध्यम जनजाति इलाकों तक लक्ष्य प्राप्ति में असफल साबित होते हैं। इसका मुख्य कारण जनजाति क्षेत्रों में मीडिया माध्यमों का लाभ लेने हेतु अनिवार्य सुविधाओं का अभाव होना है।
संदर्भ ग्रंथ सूची
·        जोशी, रामशरण, आदिवासी समाज और शिक्षा, ग्रंथ शिल्पी(इंडिया) प्रा. लि., नई दिल्ली- 1999
·        गुप्ता, रमणिका,  आदिवासी भाषा और शिक्षा, स्वराज प्रकाशन, नई दिल्ली-2012
·        नदीम हसनैन, जनजातीय भारत, जवाहर प्रकाशन, दिल्ली-2007
·        कुरूक्षेत्र, जनवरी, 19861986www.ssamis.nic.in



Friday, August 23, 2013

रिश्तों के आईने में भारतीय मीडिया

रिश्तों के आईने में भारतीय मीडिया


 
रिश्‍तों के आईने में भारतीय मीडिया इतना धंस चुका है कि उनका अब निकलना नमुमकिन-सा प्रतीत होने लगा है। यह जानकारी मेरे द्वारा संग्रहित नहीं की गई है अपितु यह जानकारी किसी अन्‍य न्‍यूमीडिया के द्वारा प्रकाशित की जा चुकी है। फिर भी मैं पुन: इस जानकारी को आप सब लोगों के सामने रख रहा हूं। यदि कोई त्रुटि रह गई हो तो संशोधन किया जा जा सकता है।
सुज़ाना अरुंधती रॉय, प्रणव रॉय (NDTV) की भांजी हैं। प्रणव रॉय “काउंसिल ऑन फ़ॉरेन रिलेशंस” के इंटरनेशनल सलाहकार बोर्ड के सदस्य हैं। इसी बोर्ड के एक अन्य सदस्य हैं मुकेश अंबानी। प्रणव रॉय की पत्नी हैं राधिका रॉय। राधिका रॉय, बृन्दा करात की बहन हैं। बृन्दा करात, प्रकाश करात (CPI) की पत्नी हैं। प्रकाश करात चेन्नै के “डिबेटिंग क्लब” के सदस्य थे। एन राम, पी चिदम्बरम और मैथिली शिवरामन भी इस ग्रुप के सदस्य थे। इस ग्रुप ने एक पत्रिका शुरु की थी “रैडिकल रीव्यू”।
CPI(M) के एक वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी की पत्नी हैं सीमा चिश्ती। सीमा चिश्ती इंडियन एक्सप्रेस की “रेजिडेण्ट एडीटर” हैं। बरखा दत्त NDTV में काम करती हैं। बरखा दत्त की माँ हैं प्रभा दत्त। प्रभा दत्त हिन्दुस्तान टाइम्स की मुख्य रिपोर्टर थीं।
राजदीप सरदेसाई पहले NDTV में थे, अब CNN-IBN के हैं। राजदीप सरदेसाई की पत्नी हैं सागरिका घोष। सागरिका घोष के पिता हैं दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक भास्कर घोष। सागरिका घोष की आंटी रूमा पॉल हैं। रूमा पॉल उच्चतम न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश हैं। सागरिका घोष की दूसरी आंटी अरुंधती घोष हैं। अरुंधती घोष संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थाई प्रतिनिधि हैं। CNN-IBN का “ग्लोबल बिजनेस नेटवर्क” (GBN) से व्यावसायिक समझौता है।
GBN टर्नर इंटरनेशनल और नेटवर्क-18 की एक कम्पनी है। NDTV भारत का एकमात्र चैनल है जो “अधिकृत रूप से” पाकिस्तान में दिखाया जाता है। दिलीप डिसूज़ा PIPFD (Pakistan-India Peoples’ Forum for Peace and Democracy) के सदस्य हैं। दिलीप डिसूज़ा के पिता हैं जोसेफ़ बेन डिसूज़ा। जोसेफ़ बेन डिसूज़ा महाराष्ट्र सरकार के पूर्व सचिव रह चुके हैं। तीस्ता सीतलवाड भी PIPFD की सदस्य हैं। तीस्ता सीतलवाड के पति हैं जावेद आनन्द। जावेद आनन्द एक कम्पनी सबरंग कम्युनिकेशन और एक संस्था “मुस्लिम फ़ॉर सेकुलर डेमोक्रेसी” चलाते हैं। इस संस्था के प्रवक्ता हैं जावेद अख्तर। जावेद अख्तर की पत्नी हैं शबाना आज़मी।
करण थापर ITV के मालिक हैं। ITV बीबीसी के लिये कार्यक्रमों का भी निर्माण करती है। करण थापर के पिता थे जनरल प्राणनाथ थापर (1962 का चीन युद्ध इन्हीं के नेतृत्व में हारा गया था)। करण थापर बेनज़ीर भुट्टो और ज़रदारी के बहुत अच्छे मित्र हैं। करण थापर के मामा की शादी नयनतारा सहगल से हुई है। नयनतारा सहगल, विजयलक्ष्मी पंडित की बेटी हैं। विजयलक्ष्मी पंडित, जवाहरलाल नेहरू की बहन हैं।
मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आन्दोलन की मुख्य प्रवक्ता और कार्यकर्ता हैं। नबाआं को मदद मिलती है पैट्रिक मेकुल्ली से जो कि “इंटरनेशनल रिवर्स नेटवर्क (IRN)” संगठन में हैं। अंगना चटर्जी IRN की बोर्ड सदस्य हैं। अंगना चटर्जी PROXSA (Progressive South Asian Exchange Network) की भी सदस्य हैं। PROXSA संस्था, FOIL (Friends of Indian Leftist) से पैसा पाती है। अंगना चटर्जी के पति हैं रिचर्ड शेपायरो। FOIL के सह-संस्थापक हैं अमेरिकी वामपंथी बिजू मैथ्यू।
राहुल बोस (अभिनेता) खालिद अंसारी के रिश्ते में हैं। खालिद अंसारी “मिड-डे” पब्लिकेशन के अध्यक्ष हैं। खालिद अंसारी एमसी मीडिया लिमिटेड के भी अध्यक्ष हैं। खालिद अंसारी, अब्दुल हमीद अंसारी के पिता हैं। अब्दुल हमीद अंसारी कांग्रेसी हैं। एवेंजेलिस्ट ईसाई और हिन्दुओं के खास आलोचक जॉन दयाल मिड-डे के दिल्ली संस्करण के प्रभारी हैं।
नरसिम्हन राम (यानी एन राम) दक्षिण के प्रसिद्ध अखबार “द हिन्दू” के मुख्य सम्पादक हैं। एन राम की पहली पत्नी का नाम है सूसन। सूसन एक आयरिश हैं जो भारत में ऑक्सफ़ोर्ड पब्लिकेशन की इंचार्ज हैं। विद्या राम, एन राम की पुत्री हैं, वे भी एक पत्रकार हैं। एन राम की हालिया पत्नी मरियम हैं। त्रिचूर में आयोजित कैथोलिक बिशपों की एक मीटिंग में एन राम, जेनिफ़र अरुल और केएम रॉय ने भाग लिया है। जेनिफ़र अरुल, NDTV की दक्षिण भारत की प्रभारी हैं। जबकि केएम रॉय “द हिन्दू” के संवाददाता हैं। केएम रॉय “मंगलम पब्लिकेशन” के सम्पादक मंडल सदस्य भी हैं। मंगलम ग्रुप पब्लिकेशन एमसी वर्गीज़ ने शुरु किया है। केएम रॉय को “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन लाइफ़टाइम अवार्ड” से सम्मानित किया गया है। “ऑल इंडिया कैथोलिक यूनियन” के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं जॉन दयाल। जॉन दयाल “ऑल इंडिया क्रिश्चियन काउंसिल” (AICC) के सचिव भी हैं। AICC के अध्यक्ष हैं डॉ जोसेफ़ डिसूज़ा। जोसेफ़ डिसूज़ा ने “दलित फ़्रीडम नेटवर्क” की स्थापना की है। दलित फ़्रीडम नेटवर्क की सहयोगी संस्था है “ऑपरेशन मोबिलाइज़ेशन इंडिया” (OM India)। OM India के दक्षिण भारत प्रभारी हैं कुमार स्वामी। कुमार स्वामी कर्नाटक राज्य के मानवाधिकार आयोग के सदस्य भी हैं।
OM India के उत्तर भारत प्रभारी हैं मोजेस परमार। OM India का लक्ष्य दुनिया के उन हिस्सों में चर्च को मजबूत करना है, जहाँ वे अब तक नहीं पहुँचे हैं। OMCC दलित फ़्रीडम नेटवर्क (DFN) के साथ काम करती है। DFN के सलाहकार मण्डल में विलियम आर्मस्ट्रांग शामिल हैं। विलियम आर्मस्ट्रांग, कोलोरेडो (अमेरिका) के पूर्व सीनेटर हैं और वर्तमान में कोलोरेडो क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेण्ट हैं। यह यूनिवर्सिटी विश्व भर में ईसा के प्रचार हेतु मुख्य रणनीतिकारों में शुमार की जाती है। DFN के सलाहकार मंडल में उदित राज भी शामिल हैं। उदित राज के जोसेफ़ पिट्स के अच्छे मित्र भी हैं। जोसेफ़ पिट्स ने ही नरेन्द्र मोदी को वीज़ा न देने के लिये कोंडोलीज़ा राइस से कहा था। जोसेफ़ पिट्स “कश्मीर फ़ोरम” के संस्थापक भी हैं। उदित राज भारत सरकार के नेशनल इंटीग्रेशन काउंसिल (राष्ट्रीय एकता परिषद) के सदस्य भी हैं। उदित राज कश्मीर पर बनी एक अन्तर्राष्ट्रीय समिति के सदस्य भी हैं।
सुहासिनी हैदर, सुब्रह्मण्यम स्वामी की पुत्री हैं। सुहासिनी हैदर, सलमान हैदर की पुत्रवधू हैं। सलमान हैदर, भारत के पूर्व विदेश सचिव रह चुके हैं, चीन में राजदूत भी रह चुके हैं। रामोजी ग्रुप के मुखिया हैं रामोजी राव। रामोजी राव “ईनाडु” (सर्वाधिक खपत वाला तेलुगू अखबार) के संस्थापक हैं। रामोजी राव ईटीवी के भी मालिक हैं। रामोजी राव चन्द्रबाबू नायडू के परम मित्रों में से हैं।
डेक्कन क्रॉनिकल के चेयरमैन हैं टी वेंकटरमन रेड्डी। रेड्डी साहब कांग्रेस के पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं। एमजे अकबर डेक्कन क्रॉनिकल और एशियन एज के सम्पादक हैं। एमजे अकबर कांग्रेस विधायक भी रह चुके हैं। एमजे अकबर की पत्नी हैं मल्लिका जोसेफ़। मल्लिका जोसेफ़, टाइम्स ऑफ़ इंडिया में कार्यरत हैं।
वाय सेमुअल राजशेखर रेड्डी आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। सेमुअल रेड्डी के पिता राजा रेड्डी ने पुलिवेन्दुला में एक डिग्री कालेज व एक पोलीटेक्नीक कालेज की स्थापना की। सेमुअल रेड्डी ने कहा है कि आंध्रा लोयोला कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उक्त दोनों कॉलेज लोयोला समूह को दान में दे दिये। सेमुअल रेड्डी की बेटी हैं शर्मिला। शर्मिला की शादी हुई है “अनिल कुमार” से। अनिल कुमार भी एक धर्म-परिवर्तित ईसाई हैं जिन्होंने “अनिल वर्ल्ड एवेंजेलिज़्म” नामक संस्था शुरु की और वे एक सक्रिय एवेंजेलिस्ट (कट्टर ईसाई धर्म प्रचारक) हैं। सेमुअल रेड्डी के पुत्र जगन रेड्डी युवा कांग्रेस नेता हैं। जगन रेड्डी “जगति पब्लिकेशन प्रा. लि.” के चेयरमैन हैं। भूमना करुणाकरा रेड्डी, सेमुअल रेड्डी की करीबी हैं। करुणाकरा रेड्डी, तिरुमला तिरुपति देवस्थानम की चेयरमैन हैं। चन्द्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि “लैंको समूह” को जगति पब्लिकेशन्स में निवेश करने हेतु दबाव डाला गया था। लैंको कम्पनी समूह, एल श्रीधर का है। एल श्रीधर, एल राजगोपाल के भाई हैं। एल राजगोपाल, पी उपेन्द्र के दामाद हैं। पी उपेन्द्र केन्द्र में कांग्रेस के मंत्री रह चुके हैं। सन टीवी चैनल समूह के मालिक हैं कलानिधि मारन। कलानिधि मारन एक तमिल दैनिक “दिनाकरन” के भी मालिक हैं। कलानिधि के भाई हैं दयानिधि मारन। दयानिधि मारन केन्द्र में संचार मंत्री थे। कलानिधि मारन के पिता थे मुरासोली मारन। मुरासोली मारन के चाचा हैं एम करुणानिधि (तमिलनाडु के मुख्यमंत्री)।
करुणानिधि ने “कैलाग्नार टीवी” का उदघाटन किया। कैलाग्नार टीवी के मालिक हैं एम के अझागिरी। एम के अझागिरी, करुणानिधि के पुत्र हैं। करुणानिधि के एक और पुत्र हैं एम के स्टालिन। स्टालिन का नामकरण रूस के नेता के नाम पर किया गया। कनिमोझि, करुणानिधि की पुत्री हैं, और केन्द्र में राज्यमंत्री हैं। कनिमोझी, “द हिन्दू” अखबार में सह-सम्पादक भी हैं। कनिमोझी के दूसरे पति जी अरविन्दन सिंगापुर के एक जाने-माने व्यक्ति हैं।
स्टार विजय एक तमिल चैनल है। विजय टीवी को स्टार टीवी ने खरीद लिया है। स्टार टीवी के मालिक हैं रूपर्ट मर्डोक।
Act Now for Harmony and Democracy (अनहद) की संस्थापक और ट्रस्टी हैं शबनम हाशमी। शबनम हाशमी, गौहर रज़ा की पत्नी हैं। “अनहद” के एक और संस्थापक हैं के एम पणिक्कर। के एम पणिक्कर एक मार्क्सवादी इतिहासकार हैं, जो कई साल तक ICHR में काबिज रहे। पणिक्कर को पद्मभूषण भी मिला। हर्ष मन्दर भी “अनहद” के संस्थापक हैं। हर्ष मन्दर एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं। हर्ष मन्दर, अजीत जोगी के खास मित्र हैं। अजीत जोगी, सोनिया गाँधी के खास हैं क्योंकि वे ईसाई हैं और इन्हीं की अगुआई में छत्तीसगढ़ में जोर-शोर से धर्म-परिवर्तन करवाया गया और बाद में दिलीपसिंह जूदेव ने परिवर्तित आदिवासियों की हिन्दू धर्म में वापसी करवाई। कमला भसीन भी “अनहद” की संस्थापक सदस्य हैं। फ़िल्मकार सईद अख्तर मिर्ज़ा “अनहद” के ट्रस्टी हैं। मलयालम दैनिक “मातृभूमि” के मालिक हैं एमपी वीरेन्द्रकुमार। वीरेन्द्रकुमार जद(से) के सांसद हैं (केरल से)। केरल में देवेगौड़ा की पार्टी लेफ़्ट फ़्रण्ट की साझीदार है।
शशि थरूर पूर्व राजनैयिक हैं। चन्द्रन थरूर, शशि थरूर के पिता हैं, जो कोलकाता की आनन्दबाज़ार पत्रिका में संवाददाता थे। चन्द्रन थरूर ने 1959 में द स्टेट्समैन की अध्यक्षता की। शशि थरूर के दो जुड़वाँ लड़के ईशान और कनिष्क हैं, ईशान हांगकांग में “टाइम्स” पत्रिका के लिये काम करते हैं। कनिष्क लन्दन में “ओपन डेमोक्रेसी” नामक संस्था के लिये काम करते हैं। शशि थरूर की बहन शोभा थरूर की बेटी रागिनी (अमेरिकी पत्रिका) “इंडिया करंट्स” की सम्पादक हैं। परमेश्वर थरूर, शशि थरूर के चाचा हैं और वे “रीडर्स डाइजेस्ट” के भारत संस्करण के संस्थापक सदस्य हैं।
शोभना भरतिया हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की अध्यक्ष हैं। शोभना भरतिया केके बिरला की पुत्री और जीड़ी बिरला की पोती हैं। शोभना राज्यसभा की सदस्या भी हैं जिन्हें सोनिया ने नामांकित किया था। शोभना को 2005 में पद्मश्री भी मिल चुकी है। शोभना भरतिया सिंधिया परिवार की भी नज़दीकी मित्र हैं। करण थापर भी हिन्दुस्तान टाइम्स में कालम लिखते हैं। पत्रकार एन राम की भतीजी की शादी दयानिधि मारन से हुई है।
न्यूज़ 24 की चेयरमेन है अनुराधा प्रसाद। अनुराधा प्रसाद कांग्रेस नेता और राहुल बाबा के तलवे चट्टू चमचे राजीव शुक्ल की पत्नी है। राजीव शुक्ल राजनीती में आने से पहले इ -टीवी हिंदी में झोला छाप पत्रकार थे। राजीव शुक्ल ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को मीडिया में किसी भी तरह लाने के लिए पत्रकारिता के सारे मूल्यों और सिधान्तो को ताक पर रख दिया। कई बार तो वे राहुल गाँधी के जूठे प्लेट उठाते और उनके जूते साफ करते भी देखे गए। उसके इनाम में राहुल गाँधी ने उन्हें राज्य सभा का सदस्य और BCCI का वाइस प्रेसिडेंट बना दिया। कुछ दिन पहले राहुल गाँधी के काफिले से एक आदमी घायल हो गया था। राहुल गाँधी ने 100 नंबर पर कॉल करके अम्बुलेंस बुला लिया। न्यूज़ 24 ने इसे “राहुल गाँधी की महानता ” के तौर पर दो दिन तक दिखाया।
प्रभु चावला पहले आज तक में थे। प्रभु चावला के बेटे के नाम है अंकुर चावला। अंकुर चावला दिल्ली में सत्ता न जाना माना दलाल है। नीरा राडिया टेप में प्रभु चावला का भी नाम आया। आज तक ने प्रभु चावला को निकाल दिया। अभी प्रभु चावला इ टीवी में है
एडमिरल सुरेश मेहता ने बरखा को कारगिल युद्ध के दौरान तीन जवानों की हत्या का दोषी माना था जिसमे बरखा की लाइव कवरेज के दौरान बताये गए लोकेशन को ट्रेस कर पाकिस्तान ने तीन भारतीय जवानों को मार गिराया था, जबकि उन्हें ऐसा करने से मोर्चे पर मौजूद सैनिकों ने बार बार रोका था, हैरानी ये कि उस वक़्त रक्षा मंत्रालय के जबरदस्त विरोध के बावजूद बरखा के खिलाफ कोई वैधानिक कार्यवाही नहीं की जा सकी थी। NDTV 24X7 की ग्रुप एडिटर बरखा दत्त और हिन्दुस्तान टाईम्स ग्रुप के एडिटर वीर सांघवी का नाम टेलीकॉम घोटाले के मामले में सीबीआई के दस्तावेज़ों में बतौर दलाल दर्ज है।
संसद नोटकांड मामले में CNN-IBN के एडिटर-इन-चीफ और मालिक राजदीप सरदेसाई का नाम बतौर सीडी मैनेजर सामने आया है।
इंडिया टुडे के ग्रुप एडिटर रहे प्रभु चावला अमर सिंह की चर्चित सीडी में डिलींग करते हुए सुनाई दे रहे हैं और उनके बेटे अंकुर चावला का नाम सीबीआई के दस्तावेजों में बतौर वित्तीय घालमेल के दलाल के तौर पर दर्ज है।
ये तो सिर्फ कुछ रिश्ते उदहारण भर हैं…. हिन्दू विरोधी मीडिया …….के ……. कुछ घटनाओ की वास्तविकता और मीडिया हैड्लाइन्स के बारे में हम अगले लेखो में बताएगे … सूचनाए कुछ पुरानी है हो सकता है कुछ त्रुटि हो अतः संशोधित स्वयं कर सकते हैं।